Sunday, 22 July 2012

घरोंदा--


SONG-


तुम्हे हो ना हो, मुझको तो इतना यकीन है
मुझे प्यार तुमसे, नही है, नही है
मुझे प्यार तुमसे, नही है, नही है
तुम्हे हो ना हो, मुझको तो इतना यकीन है

मुझे प्यार तुम से नही है, नही है
मगर मैने ये राज़ अब तक ना जाना
कि क्यूँ प्यारी लगती हैं बातें तुम्हारी
मैं क्यों तुमसे मिलने का ढूँढूँ बहाना
कभी मैने चाहा तुम्हे छू के देखूँ
कभी मैने चाहा तुम्हे पास लाना
मगर फ़िर भी,
मगर फ़िर भी इस बात का तो यकीन है
मुझे प्यार तुम से नही है, नही है
मुझे प्यार तुम से नही है, नही है
तुम्हे हो ना हो मुझको तो इतना यकीन है

फ़िर भी जो तुम दूर रह्ते हो मुझसे
तो रहतें हैं दिल पे उदासी के साये
कोई ख्वाब ऊँचे मकानों से झाँके
कोई ख्वाब बैठा रहे सर झुकाये
कभी दिल की राहों मे फ़ैले अन्धेरा
कभी दूर तक रोशनी मुस्कराए
मगर फ़िर भी,
मगर फ़िर भी, इस बात का तो यकीन है
मुझे प्यार तुम से नही है, नही है
मुझे प्यार तुम से नही है, नही है
तुम्हे हो ना हो मुझको तो इतना यकीन है…
:-)

Wednesday, 18 July 2012

फ़िकर मत करना


सूरज की किरणों जैसी तेरी वो मुस्कान
मन के किसी कोने मे जो बस रही थी अब तक
पा लूँगा तुमको फ़िर से, अनकहे मेरे सब अरमान
भुला चुका हुं , तुम फ़िकर मत करना

धडकता था जब दिल तेर भी
आबाद था ये गुलिस्ताँ मेरा भी
शामे जो बीती तेरा हाथ थाम कर
रातें वो कट जाती थी तेरी राह तांक कर
लम्हे लम्हे मे पिरोया था मैने जो प्यार
मिटा चुका हुं, तुम फ़िकर मत करना

बेसब्री से जब होता था इन्तज़ार
मौज मस्ती और ढेर सारा प्यार
रोज़ाना मिलना तेरा उसी पुराने घर के पास
वाक़िफ़ था मेरे इश्क से जहां हर आम और खास
वो नुक्क्ड ,वो गलियॉ , वो राहें
ठुकरा चुका हुं , तुम फ़िकर मत करना

आँखें नम होती थी जब फ़िकर मे तेरी
तेरी एक चहक रोकती थी साँसे मेरी
बेवजह की ही बातें ,बाँधती थी समां सभी
जानता था मै जब , ना टूटेगा ये रिश्ता कभी
सीखा था तुमसे रिश्ते समझना
दफ़ना चुका हुं , तुम फ़िकर मत करना

सब कुछ तो खत्म कर दिया है मैने
पर अब भी कुछ-कुछ बचता है
बहलाया है दिल को काफ़ी, फ़िर भी ये तड्पता है
खुली है जब जब मेरी आँखें
तेरा ही तसव्वुर बसता है
बंद हुई इन आँखो मे भी एक ही नूर चमकता है
आँखो की उन बातों को अब
छिपा चुका हुं , तुम फ़िकर मत करना॥

Tuesday, 17 July 2012

मुस्कान--


प्यार से प्यारी मुस्कान से तेरी
खिल उठ्ता है ये सारा जहाँ
बहुत से लोग हैं इस दुनिया मे
जिनको है बस यहि गुमान
अल्लाह ने बख्शी है रेह्मत ह्म पर
मिली है ह्मको एक नन्ही सी खुशी
मन्नते बस रह गई हैं इतनी
छिने ना हमसे ये खुशी कभी
चाहे जितनी पतझड आयें
इसे कभी ना मुरझा पाये
हर बसंत सावन की बूँदें
प्रेम मल्हार सुना जाएं
चिरिया जैसी बोली तेरी
मेरा दिल चहका जाए…
:-)

Monday, 16 July 2012

YAADEIN--



Ruksat ho gai h jo,
bematlab reh gai h jo
bewjh hi yad aati h
whi tumhari yaadein

dil bhi cheer kr rkh dia
shayd hi mne kuch na kia
khushiyan bhi apni ki kurban
lai tere chehre pe jo muskan

masumiyat bhari wo shuruat
pyari si thi jo mulakaat
bewjh mujhe rulati hain
whi tumhari yaadein

nai dishaein, nai rahein
tumne thama unka haath
hum to sang rahenge hi
mujhko tha poora vishwas

par aa hi gain teri majburiyan
afsos,bdha gai wo duriyan
rato ki neend udaati hain
whi tumhari yaadein

koshishein ho gai vifal
dono hi hm gae badal
bichhad gae hamare hath
ab kaisa hoga ye sath?

jo bhi ho, jaisa bhi ho
m khush hun, agr tum khush rho
sch me, mere lie kafi hain
whi tumhari yaadein..!!!!