सूरज की किरणों जैसी तेरी वो मुस्कान
मन के किसी कोने मे जो बस रही थी अब तक
पा लूँगा तुमको फ़िर से, अनकहे मेरे सब अरमान
भुला चुका हुं , तुम फ़िकर मत करना
धडकता था जब दिल तेर भी
आबाद था ये गुलिस्ताँ मेरा भी
शामे जो बीती तेरा हाथ थाम कर
रातें वो कट जाती थी तेरी राह तांक कर
लम्हे लम्हे मे पिरोया था मैने जो प्यार
मिटा चुका हुं, तुम फ़िकर मत करनाबेसब्री से जब होता था इन्तज़ार
मौज मस्ती और ढेर सारा प्यार
रोज़ाना मिलना तेरा उसी पुराने घर के पास
वाक़िफ़ था मेरे इश्क से जहां हर आम और खास
वो नुक्क्ड ,वो गलियॉ , वो राहें
ठुकरा चुका हुं , तुम फ़िकर मत करना
आँखें नम होती थी जब फ़िकर मे तेरी
तेरी एक चहक रोकती थी साँसे मेरी
बेवजह की ही बातें ,बाँधती थी समां सभी
जानता था मै जब , ना टूटेगा ये रिश्ता कभी
सीखा था तुमसे रिश्ते समझना
दफ़ना चुका हुं , तुम फ़िकर मत करना
सब कुछ तो खत्म कर दिया है मैने
पर अब भी कुछ-कुछ बचता है
बहलाया है दिल को काफ़ी, फ़िर भी ये तड्पता है
खुली है जब जब मेरी आँखें
तेरा ही तसव्वुर बसता है
बंद हुई इन आँखो मे भी एक ही नूर चमकता है
आँखो की उन बातों को अब
छिपा चुका हुं , तुम फ़िकर मत करना॥
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